घर की बड़ी बेटी की शादी मात्र 16 साल की उम्र में ही हो गयी थी और इस बाल विवाह को बड़ा भाई बंशीलाल रोक नहीं पाया था। इसका गहरा मलाल था उसके मन में। लेकिन जब छोटी बहन अर्चना के भी बाल विवाह की नौबत आन पड़ी तो बंशीलाल ने दादा, चाचा और फिर पिता से जिद के साथ बात करके इसे रुकवाया। अर्चना की शादी तब हुई जब उसने 12वीं पास कर ली थी और उसकी उम्र 20 साल से ज्यादा थी। बड़ी बहन के मुकाबले आज अर्चना ज्यादा खुश है। उतना ही खुश बंशीलाल भी है।

बलरामपुर जिले के महुवा गांव के बंशीलाल बीते दुख को याद करते हुए कहते हैं—  घर की बड़ी बेटी की जब 16 साल की उम्र में पिताजी ने शादी तय की तो उस समय 21 साल का बंशी खुद भी पढ़ाई कर रहा था और उस बाल विवाह को रुकवाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया था। शादी के बाद का बहन का जीवन देख कर उसका दुख और बाल विवाह के खिलाफ संकल्प बढ़ता ही गया। इसलिए जब छोटी बहन अर्चना के लिए भी वही हालात बनने लगे तो बंशीलाल ने परिवार के बड़ों के सामने तर्क रखा कि क्या आपलोग अर्चना को शादी के बाद बीमार, चिंतित और दुखी देखना चाहते हैं। अपने मजबूत तर्कों के बल पर इस बाल विवाह को बड़ों की रजामंदी के साथ रुकवाने में सफल रहा बंशीलाल।

स्मार्ट बेटियां अभियान से जुड़ी इंटरनेट साथी रंजना ने यह वीडियो कथा बनाकर अमर उजाला को भेजी है।

अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड, फिया फाउंडेशन और जे.एम.सी. के साझा  अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।

Share:

Related Articles: