डॉक्टर बनना मेरा सपना है, उसके बाद ही मैं शादी करना चाहती हूँ—  शालू को अपने इस सपने को पूरा करने की छूट मिली है। इंटरमीडिएट में पढ़ रही 15 साल की शालू अपने माता-पिता से बहुत खुश है क्योंकि उन्होंने अपना मन बदलकर छोटी उम्र में बेटी की शादी न करने की बात मान ली और उसे आगे पढ़ने की छूट दी। डॉक्टर बनने का सपना मन में संजोए शालू मेहनत से पढ़ रही है।

श्रावस्ती के धुम्बोझी गांव की शालू के 14 साल की होते ही उसकी शादी की बात पिता ने चला दी थी। घर बैठकर सिलाई करके अपने किसान पति को आर्थिक सहयोग करने वाली शालू की मां ने उसके पिता को बेटी के आगे पढ़ने के सपने के बारे में न केवल बताया बल्कि इस बात के तैयार भी किया कि शालू को आगे पढ़ने दिया जाए। शालू के साथ ही उसके छोटे भाई और छोटी बहन की पढ़ाई के लिए भी मां की सिलाई की कमाई ही काम आती है। सब मिलकर साझे सपनों को पूरा करने के लिए साझी ताकत के बल पर आगे बढ़ रहे हैं।

स्मार्ट बेटियां अभियान से जुड़ी इंटरनेट साथी पिंकी देवी ने संजना से विस्तार से बात करके यह वीडियो कथा बनाकर अमर उजाला को भेजी है।

अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड, फिया फाउंडेशन और जे.एम.सी. के साझा  अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।

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