अंजलि राव ने अगर तीन साल पहले आशा बहू की ट्रेनिंग न ली होती तो आज वह एक साधारण गृहिणी होतीं। लेकिन आज वे न सिर्फ अपना घर अच्छे से संभालती हैं, बल्कि आसपास के गांवों में भी परिवारों को बाल विवाह करने से रोकती हैं।

श्रावस्ती के जमुनहा ब्लॉक में सेहरिया गांव की निवासी अंजलि के पति विजय कुमार क्षेत्र के ग्राहक सेवा केंद्र में काम करते हैं। उनकी एक बेटी है अंशिका जो दूसरी कक्षा में पढ़ रही है। बेटा रवि पहली कक्षा का छात्र है। अंजलि बताती हैं‌ कि जिले के हालात बहुत खराब हैं। यहां आए दिन किसी बाल विवाह की खबर आती है। कच्ची उम्र में बच्चों या बच्चियों का ब्याह कर दिया जाता है। कई छोटी लड़कियों की सेहत और पढ़ाई लिखाई पर बाल विवाह का ग्रहण लग चुका है। परिवार वाले पता नहीं क्यों, उनका दर्द देख नहीं पाते। तरह-तरह की पुरानी मान्यताओं और गरीबी के चलते वे बेटियों को जल्द घर से विदा करने पर आमादा रहते हैं।

लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। अंजलि बताती हैं कि जब वे परिवारों में आशा बहू के रूप में जाती हैं तो उन्हें समझाती हैं। बाल विवाह के नुकसान कायदे से समझाती हैं। उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में स्थिति सुधरेगी।

अमर उजाला और यूनीसेफ के ` स्मार्ट बेटियां` अभियान के तहत इंटरनेट साथी अंजलि ने यह वीडियो कथा बनाकर अमर उजाला को भेजी है।

अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड, फिया फाउंडेशन और जे.एम.सी. के साझा अभियान `स्मार्ट बेटियां` के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।

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