इंसेफेलाइटिस से बचाव के लिए जागरुक कर गया 'कुलदीपक'

अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से गोरखपुर के गांव तिनकोनिया नंबर दो में बुधवार, 20 दिसम्बर, 2017 को इंसेफेलाइटिस से बचाव के लिए प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिकाओं और छात्राओं द्वारा 'कुलदीपक' नमक शीर्षक से नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गयाl छात्राओं ने भावपूर्ण नाटक के माध्यम से स्थानीय लोगों को इंसेफेलाइटिस से बचाव के तरीके बताए और साबित किया कि इंसेफेलाइटिस बिमारी के खिलाफ छिड़ी जंग में वह हिरावल दस्ते की सिपाही बन गई हैंl 

गौरतलब हो कि इंसेफेलाइटिस से बचाव के लिए जनजागरूकता अभियान की शुरुआत रविवार, 17 दिसम्बर, 2017 से गोरखपुर में प्राथमिक विद्यालय में आयोजित गोष्ठी के माध्यम से की गई थीl 

‘कुलदीपक’ का कथानक इस प्रकार है-

घर में पोता जन्मा। दादी बधाइयां गाती हैं। बेटा, बहू और बेटी पूरे गांव का मुंह मीठा कराते हैं। तभी नवजात की तबीयत बिगड़ती है। बहू-दादी उसे बंगाली डॉक्टर (झोलाछाप) के पास ले जाती हैं। वह दवाएं देकर दो दिन बाद बुलाता है पर मासूम की ठीक नहीं होता। अब झोलाछाप बच्चे की हालत गंभीर देखकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले जाने को कहता है। वहां नवजात की मौत हो जाती है। चिकित्सक बताते हैं कि लाने में देर हुई। यहीं दादी को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी मिलती है। शोकग्रस्त दादी गांववालों को बताती हैं कि बच्चों को तेज बुखार होने पर वह 108 नंबर पर फोन करने या आशा से संपर्क करने का संदेश देती हैं। जानकार होती, सही समय पर अस्पताल ले जाती तो आज पोता मेरी गोद में खेल रहा होता-भावुक करते इस संदेश के साथ नाटक खत्म हुआ तो पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा। अंकिता (दादी), नंदिनी (बेटा), लक्ष्मी (बहू), साईमा (बेटी), शिवांगी (डॉक्टर) और महक (झोलाछाप) ने शानदार अभिनय किया। मुस्कान, शिखा, नाजिया आदि ने गांववालों की भूमिका निभाई।

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