00 अमर उजाला शब्द सम्मान में सम्मानित होंगी साहित्य जगत की नामचीन हस्तियां
अमर उजाला शब्द सम्मान में सम्मानित होंगी साहित्य जगत की नामचीन हस्तियां

मराठी के विख्यात कवि-उपन्यासकार भालचंद नेमाडे और हिंदी के प्रख्यात कथाकार और संपादक ज्ञानरंजन को 28 दिसंबर, 2019 की शाम मुंबई के नरीमन पॉइंट स्थित यशवंतराव चव्हाण सेंटर में आयोजित भव्य समारोह में अमर उजाला शब्द सम्मान के सर्वोच्च अलंकरण 'आकाशदीप' से नवाजा जाएगा। भारतीय भाषाओं के सामूहिक स्वप्न के सम्मान में अमर उजाला फाउंडेशन ने शब्द सम्मानों की स्थापना की है ताकि समस्त भारतीय भाषाओं में बंधुत्व को स्थापित किया जा सके। दोनों मनीषियों को लेखन जीवन के समग्र अवदानों के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया जा रहा है। प्रख्यात कवि-फ़िल्मकार श्रीयुत् गुलज़ार के हाथों शब्द साधकों का सम्मान होगाl

वर्ष 2018 की जिन श्रेष्ठ कृतियों के लिए शब्द सम्मानों की घोषणा हुई है वे हैं- 'छाप' श्रेणी में कथा (उपन्यास) वर्ग में ज्ञान चतुर्वेदी के उपन्यास ‘पागलखाना’ और कविता वर्ग में गगन गिल के संग्रह ‘मैं जब तक आई बाहर’ को चुना गया है। कथेतर वर्ग में 'छाप' सम्मान सुनीता बुद्धिराजा की कृति ‘रसराज : पंडित जसराज’ को दिया जाएगा। किसी भी रचनाकार की पहली किताब वाला 'थाप', अंबर पांडेय की कृति ‘कोलाहल की कविताएं' को मिलेगा। भारतीय भाषाओं में अनुवाद के लिए भाषा-बंधु सम्मान, प्रख्यात रचनाकार शंख घोष की बांग्ला गद्य कृति ‘नि:शब्द की तर्जनी’ के हिंदी अनुवाद के लिए उत्पल बैनर्जी को प्रदान किया जाएगा।

इन सम्मानों में एक-एक लाख रुपये की राशि सम्मिलित है। प्रख्यात कथाकार अब्दुल बिस्मिल्लाह, विख्यात कवि अरुण कमल, वरिष्ठ आलोचक नंदकिशोर आचार्य, सुप्रसिद्ध कवयित्री अनामिका तथा प्रसिद्ध समीक्षक ज्योतिष जोशी के उच्चस्तरीय निर्णायक मंडल ने इन कृतियों को अपनी कसौटी पर परखा। अमर उजाला शब्द सम्मान शीघ्र ही एक समारोह में अर्पित किए जाएंगे।

अमर उजाला शब्द सम्मान, देश के सर्वाधिक प्रसारित हिंदी दैनिकों में शामिल अमर उजाला प्रकाशन समूह द्वारा प्रवर्तित अमर उजाला फाउंडेशन ने स्थापित किए हैं। इस वर्ष 'आकाशदीप' से सम्मानित भालचंद्र नेमाडे का मराठी साहित्य पर गहरा प्रभाव है। कोसला और हिंदू जैसी अप्रतिम कृतियों ने उन्हें समय के श्रेष्ठतम सर्जकों में शामिल कर दिया। हिंदी के लिए आकाशदीप से सम्मानित ज्ञानरंजन जबर्दस्त कथाकार हैं और 'पहल' पत्रिका जरिए उन्होंने तीन पीढ़ियों को वैचारिकता से दीक्षित किया है।  

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