मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने छात्रों को किया सम्मानित

अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा संचालित अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति-2015 के लिए चुने गए 38 विद्यार्थियों को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने बुधवार 10 फरवरी को मंत्रालय में बुलाकर सम्मानित किया।
छात्रों को संबोधित करते हुए स्मृति ईरानी ने कहा, ‘आपका लक्ष्य सिर्फ पैसा कमाने का जरिया न बने। आपके लक्ष्य से समाज सेवा और देश की प्रगति में योगदान होना चाहिए।’ इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बच्चों को अपना शुभकामना संदेश भेजा। प्रधानमंत्री ने समाज के कमजोर तबके के मेधावी छात्रों को अमर उजाला फाउंडेश्‍ान की ओर से छात्रवृत्ति देने की इस पहल की तारीफ की। प्रधानमंत्री के संदेश और केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री के हाथों सम्मानित होकर छह राज्यों के इन 38 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के चेहरे पर निराली चमक थी। अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति के इन विजेताओं और उनके अभिभावकों के लिए बुधवार का दिन बेहद खास था। इस अवसर पर गोरखपुर के दो नेत्रहीन विद्यार्थियों को विशिष्ट सम्मान के तहत छात्रवृत्ति दी गई। केंद्रीय मंत्री ने बच्चों को बधाई देते हुए कहा कि यह छात्रवृत्ति आपको मेरिट के आधार पर मिल रही है। यह निश्चित रूप से आपकी मेहनत का फल है। आगे भी आप इसी तरह सफलता के नए आयाम छूएं और अपने-अपने सपनों को साकार करें। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री ने इन विद्यार्थियों से खुलकर अनौपचारिक बातचीत की। सम्मान समारोह से पहले छह राज्यों से आए इन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने अपने अभिभावकों के साथ दिल्ली के कई दर्शनीय स्थल भी देखे। इंडिया गेट स्थित अमर जवान ज्योति से दिल्ली दर्शन की शुरुआत करते हुए यह टीम राष्ट्रपति भवन और संसद भवन देखने के बाद लाल किले के इतिहास से रू-ब-रू हुई।
बुधवार को दिल्ली के शास्त्री भवन में अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा में सफल हुए 38 विद्यार्थियों के साथ मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी। फोटो ः जी पॉल
•नौवीं-दसवीं के 19 विद्यार्थियों को 30-30 हजार रुपये की एकमुश्त छात्रवृत्ति
•11वीं, 12वीं के छात्रों को दी गई 50-50 हजार रुपये की एकमुश्त छात्रवृत्ति
पहली बार राजधानी घूमने का रहा शानदार अनुभव
दिल्ली भ्रमण के दौरान जम्मू से आए दसवीं के छात्र विश्वास गुप्ता ने कहा कि इससे पहले उन्होंने इंडिया गेट को सिर्फ टीवी में देखा था और किताबों में पढ़ा था। यहां आकर इस स्मारक और इसके नीचे निरंतर जल रही अमर जवान ज्योति के महत्व को जान पाया। वहीं देहरादून से आई शरमीन परवीन ने बताया कि लाल किले का इतिहास किताबों में तो बहुत बार पढ़ा था, लेकिन आज घूमकर इसके इतिहास को जानना शानदार अनुभव था। दूसरे बच्चों के भी कुछ ऐसे ही अनुभव थे। कई बच्चे तो देश की राजधानी में पहली बार घूमने आए थे।
बच्चों को मिलेगा आगे बढ़ने का हौसला
अपने भतीजे निखिल जोशी के साथ नैनीताल से आए भैरवदत्त बजेठा के अनुसार, अमर उजाला द्वारा गरीब तबके के बच्चों को छात्रवृत्ति देना और उन्हें देश की राजधानी में भ्रमण कराना एक शानदार अनुभव है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को भी आगे बढ़ने का हौसला मिलेगा।