Amar Ujala Foundation

रत्नमुनि जैन कालेज में लगी ‘पुलिस की पाठशाला

अमर उजाला फाउंडेशन
की पहल
एसएसपी राजेश डी मोदक ने दिए सुनहरे भविष्य के मंत्र
बहुत जरूरी है संगत अच्छी हो
मेजबान कालेज के प्रधानाचार्य डा. अनिल कुमार वशिष्ठ ने कहा कि बड़े अपराध की शुरूआत छोटी बातों से होती है। पान-गुटखे की आदत चोरी सिखा सकती है तो बुरी सोहबत अपराधी बना सकती है। उन्होंने इसे पानी की एक बूंद के गर्म तवे, कमल के फूल और सीप में पड़ने के परिणाम से समझाया।
सही-गलत का अंतर पहचानें
मंडलीय उप शिक्षा निदेशक आरपी शर्मा ने कहा कि पुलिस की पाठशाला बहुत ही महत्वपूर्ण है। कई बार बच्चों से अनजाने में अपराध हो जाता है। इसलिए बच्चे क्या सही है क्या गलत इसके बारे में जानें। कहीं भी आपराधिक गतिविधि देखें तो पुलिस को तुरंत सूचना दें। इससे उस पर नियंत्रण हो सकेगा।
कारण हटा दें बुराई नहीं रहेगी
डायट प्राचार्य कमलेश कुमार ने कहा कि बुराई को हटाने के लिए उसके कारणों को हटाना जरूरी है। उंगली आग में डालेंगे तो जलेगी ही। संवैधानिक व्यवस्था के तहत रहेंगे तो कोई परेशानी नहीं होगी। सकारात्मक सोच, कठिन परिश्रम और बड़ों का आशीर्वाद विद्यार्थियों को आगे बढ़ने में मदद करता है।
बन सकते हैं पुलिस की आंख-कान
एएसपी लोहामंडी शैलेष कुमार पांडेय ने कहा कि कहीं कुछ गड़बड़ घटित होता देखें तो पुलिस को सूचित करें। खास तौर पर छात्राओं से कहा कि उन्हे कोई परेशान करे तो इसे छिपाएं नहीं। अपने अभिभावकों या शिक्षकों को जरूर बताएं। वह वीमेंस पावर हेल्पलाइन 1090 के जरिए भी पुलिस की भी मदद ले सकती हैं। सोशल साइट्स और मोबाइल के प्रयोग में सावधानी बरतें। छोटी सी गलती भी मुसीबत बन सकती है।
पुलिस आपकी (विद्यािर्थयों से) मित्र है। इसे समझने के लिए थानों का भ्रमण करें। जब वहां जाएं तो कमियों पर भी नजर रखें आैर बताएं। इससे सुधार में मदद मिलेगी।
आगरा। लोहामंडी के रत्नमुनि जैन इंटर कालेज में सोमवार का दिन विशिष्ट रहा। यहां अमर उजाला फाउंडेशन और आगरा पुलिस के संयुक्त अभियान ‘पुलिस की पाठशाला’ की शुरुआत हुई। विद्याथियों ने वह पाठ पढ़ा जिसमें उन्हें सफलता और देश के भविष्य के रूप में विकसित होने की प्रेरणा मिली। इस अनूठी पाठशाला के प्राचार्य (मुख्य वक्ता) के रूप में उन्हें वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश डी मोदक ने सुनहरे भविष्य के मंत्र दिए।
एसएसपी ने मंच पर आते ही बच्चों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया। उनसे उनकी रुचियां पूछीं और उनके जरिए ही बेहतर जानकारी पाने के उपाय बताए। उन्होंने खुद को उदाहरण के रूप में पेश किया और बताया कि किस तरह मां और एक टीचर की सीख ने उन्हें सामान्य विद्यार्थी से आईपीएस अफसर में बदल दिया। पुलिस कप्तान ने विद्यार्थियों से कहा कि मां से बड़ी कोई पाठशाला नहीं। यदि वे सिर्फ अपनी मां की हर सीख और शिक्षक की सलाह पर अमल करते रहे तो निश्चित ही वह उनकी तरह अधिकारी या फिर जो चाहें बन सकते हैं। क्योंकि मां की सीख बुरी सोहबत और आदतों से बचाती है। इन्हीं से बिगड़ने की शुरूआत होती है और यहीं से अपराध की राह भी निकलती है।
कार्यक्रम के अध्यक्ष और उप शिक्षा निदेशक आरपी शर्मा, विशिष्ट अतिथिगण प्राचार्य डायट कमलेश कुमार और एएसपी शैलेंद्र पांडेय ने भी विचार रखे। सबने अमर उजाला के इस पहल की सराहना की। धन्यवाद ज्ञापन प्रधानाचार्य डा. अनिल वशिष्ठ ने किया।
नेशनल क्राइम ब्यूरो के वर्ष 2013 के आंकड़े बताते हैं कि देशभर में 38765 और यूपी में 1291 बच्चों (7-18 साल) ने आपराधिक वारदात किए। इनमें तमाम ने कभी फिल्में देखकर तो कभी एडवेंचर के चक्कर में ऐसे काम किए जो अपराध हैं, लेकिन उन्हे पता न था। इसे देखते हुए अमर उजाला फाउंडेशन ने आगरा पुलिस के साथ मिलकर ‘पुलिस की पाठशाला’ शुरू की। इसके तहत किशोरों-युवाओं को अपराध और उनके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जाएगा। इससे जहां किशोरों को जिम्मेदार नागरिक बनाने में मदद मिलेगी, पुलिस के बारे में उनकी भ्रांतियां दूर होंगी तो अपराध नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।