Amar Ujala Foundation

अमर उजाला फाउण्डेशन और पुलिस को बच्चों ने कहा थैंक्स

हिसार। अंकों की चिंता और करियर की दौड़ में हमारी मानवीय संवेदनाएं खत्म होती जा रही हैं। समाज में कई प्रतिष्ठित व्यक्ति होते हैं, लेकिन अधिकांश में संवेदनाओं का अभाव है। ऐसे में व्यक्ति ही व्यक्ति का दर्द नहीं समझ रहा है और समाज संवेदन शून्य हो जाता है। सच तो यह है कि नौकरी पैकेज के उधेड़बुन में मानवीय संवेदनाओं ने दम तोड़ दिया है। उच्च डिग्रीधारी तो लाखों हैं, लेकिन इंसानियत का धर्म कुछ ही निभा रहे हैं। इसलिए शिक्षण संस्थाओं की महती जिम्मेदारी बनती है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ संस्कार व संवेदनाओं का पाठ भी पढ़ाएं, ताकि सड़क पर घायल पड़े व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाया सके। शोषण और अन्याय के प्रति आवाज उठाई जा सके।
अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से शनिवार को आयोजित पुलिस की पाठशाला में तीन सौ से अधिक छात्र-छात्राओं को यह सीख दी गई। यहां सूर्य नगर फाटक के पास होली चाइल्ड सी. से. स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में सीन ऑफ क्राइम हिसार रेंज के सहायक निदेशक डॉ. अजय कुमार व मानवाधिकार आयोग से पुरस्कृत एएसआई सज्जन कुमार ने विद्यार्थियों को यातायात नियमों की जानकारी दी, वहीं नारी जाति का सम्मान करने की अपील की। इस मौके पर छात्र-छात्राओं ने कई सवाल पूछे। साथ ही शहर के ट्रैफिक को लेकर अपने सुझाव भी दिए। इस मौके पर नशा से दूर रहने और कन्या भ्रूण हत्या नहीं करने का संकल्प दिलाया गया। स्कूल निदेशक राजपाल सिंह सिंधू ने भी विचार रखते हुए डॉ. अजय कुमार व सज्जन कुमार को सम्मानित किया। कार्यक्रम में आईजी पीआरओ दिनेश भी मौजूद थे।
यह दी सीख
– नशा से दूर रहें और इस पर चिंतन करें
– तेज गति में बाइक नहीं चलाएं
– लड़कियों के साथ छेड़छाड़ नहीं करें
– गलत जगह वाहन पार्क नहीं करें
– स्पीड लिमिट का फॉलोअप करें
– हेलमेट पहनकर ही वाहन चलाएं
– सेफ्टी बेल्ट का सदैव उपयोग करें
यह हैं मानवीय मूल्य
– संस्कार
– परोपकार
– भलाई
– ईमानदारी
– अनुशासन
– अच्छी संगत
– सम्मान और सहयोग
– संवेदना
हिसार। पुलिस की पाठशाला को लेकर विद्यार्थियों में उत्साह दिखा, वहीं उत्सुकता भी नजर आई। पुलिस से सीधे रूबरू होने और अपनी जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए विद्यार्थियों ने अमर उजाला और पुलिस महकमे को थैंक्स कहा। बच्चों ने बताया कि एक ओर जहां कानून की जानकारी और कानूनी अधिकारों का पता चला। वहीं पुलिस के प्रति उनकी सोच भी बदली।
हेलमेट को नहीं समझें भार
पुलिस की पाठशाला में बच्चों को समझाया गया कि हेलमेट को भार नहीं समझें। अमूमन चालान से बचने के लिए लोग हेलमेट पहनते हैं, यह मानसिकता ठीक नहीं। सड़क दुर्घटनाओं में 80 फीसदी मौत सिर की चोट के कारण होती है। यदि वाहन चालक हेलमेट पहनें तो 80 फीसदी मौतें रोकी जा सकती हैं।
प्रश्न पूछने के लिए हर विद्यार्थी उत्साहित
पुुलिस की पाठशाला में हर छात्र-छात्रा अपने प्रश्न पूछने को लेकर उत्साहित नजर आया। प्रश्नों के साथ विद्यार्थियों ने समस्याओं के समाधान के लिए सुझाव भी दिए। हालांकि समयाभाव के कारण हर छात्र को प्रश्न पूछने का मौका नहीं मिल सका। इस पर एएसआई सज्जन कुमार ने विद्यार्थियों को अपना मोबाइल नंबर दिया, जिस पर छात्र मैसेज कर प्रश्न पूछ सकते हैं। श्रेष्ठ प्रश्नकर्ता विद्यार्थी को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से सम्मानित किया गया।
सुधार की शुरुआत स्वयं से
अच्छे वातावरण के लिए जैसा हम चाहते हैं उसकी शुरुआत खुद से करनी होगी। सुधार का रास्ता दूसरों से नहीं स्वयं से शुरू होता है। जब हर व्यक्ति यह प्रण ले ले तो समाज स्वत: ही सुधर जाएगा। इसलिए हर व्यक्ति को स्वयं को एक उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत करना होगा। ऐसे में बच्चे जागरूक हो जाएं तो अभिभावक भी जागरूक हो जाएंगे।
भयमुक्त वातावरण में सबका सहयोग जरूरी
पुलिस की पाठशाला में बच्चों को बताया गया कि अपराध मुक्त और भयमुक्त वातावरण निर्माण के लिए सबका सहयोग जरूरी होता है। यदि स्वयं कानून की पालना करेंगे, ट्रैफिक नियमों को नहीं तोड़ेंगे और एक दूसरे का सम्मान करेंगे तो समाज में अपराध नहीं होंगे और भयमुक्त वातावरण का निर्माण होगा।
सड़कों पर शिष्टाचार का अभाव
डॉ. अजय कुमार ने कहा कि सड़कों पर शिष्टाचार का अभाव है। नतीजतन भारत में सर्वाधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। उन्होंने बताया कि विश्व के कुल वाहनों में से महज एक फीसदी वाहन ही भारत में है, लेकिन सड़क दुर्घटनाएं दस फीसदी से अधिक हैं। इससे पता चलता है कि सड़क पर चलने में हम कितनी लापरवाही बरतते हैं। लापरवाही के साथ-साथ ईगो के साथ भी ड्राइव करते हैं।
पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में बहुत अच्छा लगा। बड़े वाहनों की तरह साइकिल चलाने के लिए हेलमेट जरूरी कर दिया जाए तो अच्छा रहेगा। इससे हेलमेट पहनने की शुरू से ही आदत हो जाएगी।
– छात्र, संदीप
ऑटो की समस्या अधिक है। इस कारण जाम लगता है और सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। राजगुरु मार्केट में पार्किंग की पहल कर पुलिस ने अच्छी शुरूआत की है। लोगों को काफी राहत मिली। - छात्रा, प्रिया
हाईवे पर सर्वाधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इसलिए हमें यहां पर सर्वाधिक ध्यान देने की जरूरत है। हेलमेट पहनने के लिए हम सभी को प्रेरित करना चाहिए।
– छात्र, रविंद्र सिंह
सर शहर की सड़क खराब होती है तो दुर्घटनाएं अधिक होती हैं। खराब सड़कों की रिपेयर जल्द क्यों नहीं होती है। क्या इस दिशा में पुलिस महकमा कार्रवाई नहीं कर सकता है।
– छात्रा, अंजू
ट्रैफिक नियमों केे तोड़ने वाले जुुर्माना भरने के बजाए फोन करके एप्रोच करते हैं। इस तरह अनुशासन टूटता है। पुलिस इनके दबाव में क्यों आ जाती है।
छात्रा, तनीषा
अधिकारों के साथ-साथ हमें जिम्मेदार नागरिक बनना होगा। ओवरलोड वाहन चालकों को हमें ऐसा करने से रोकना चाहिए। इस तरह सड़क दुर्घटनाओं को रोक सकते हैं।
– छात्रा, सुशीला